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Friday, 17 August 2018

पेट कि चर्बी कम करेंगी ये महत्वपुर्ण टीप्स


पेट कि चर्बी कम करेंगी ये महत्वपुर्ण टीप्स


पेट कि चर्बी बढना केवल सौंदर्य के लिए हानिकारक नही है बल्की ये स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह है। आज कल की फास्ट जीवनपद्धती, फास्ट फुड का अधिक सेवन और व्यायाम का अभाव और ऎसी अन्य बहोत सी वजह से पेट के क्षेत्र मे चर्बी जमा होना आज कल सामान्य हो गया है। बढी हुइ Belly fat महिलाओ मे बॉडी फिगर और सौंदर्य को कम करणे मे अग्रणी है। शरीर मे जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर मे कोलेस्टेरॉल, रक्तचाप को भी बढाकर शरीर मे रोगो के लिए स्थान निर्मान करती है।
यहा लिखी गई अनुभुत आयुर्वेदिक टीप्स पेट पर चर्बी जमा नही होणे देती और बढी हुई चर्बी को कम करती है जिससे शरीर सुडौल व आकर्षक बना रहणे मे मदद होती है |

१. जंक फुड/ फास्ट फुड को कहे बाय बाय-
अगर आप पेट की चर्बी कम करने के लिए गंभीर हैं तो जंकफूड/फास्ट फुड  से दूरी बनाए रखें क्योंकि जंकफूड तेजी से वजन बढ़ाने का काम करता है। कोशिश करें कम तेल मसाले वाली चीजों का सेवन ही करें। ऎसे पदार्थो मे मौजुद प्रीसर्वेटीव्स के कारण शरीर क मेटाबोलिजम खराब होकर अतिरीक्त चर्बी बढना शुरु होता है। कभी-कभी स्टीम सब्जियों का सेवन भी फायदेमंद साबित हो सकता है। सामान्य आटे के बजाय जौ और चने के आटे को मिलाकर चपाती खाना चाहिए। आटे व मैदे की चीजो से एवं Fermented खाने से (इडली/ डोसा/ उत्तपा) दुरी बनाये रखे।

२.धीरे धीरे खाये खाना-
मस्तिष्क मे उपस्थित Satiety center तक खाना पुरा होने की संवेदना पहुचने मे २५ से ३५ मिनट लगते है, शीघ्र गती से खाने की आदत से मस्तिष्क मे उपस्थित Satiety center तक जल्दी संवेदना न पोहोचने के कारण अधिक मात्रा मे आहार का सेवन हो जाता है जो पाचक स्रावो मे ठीक से घुल नही पाता व पचने मे वक्त लेता है और शरीर मे चर्बी मे रुपांतरीत होता है, धीरे धीरे खाया हुआ खाना लालास्राव व अन्य पाचक रसो मे अच्छे घुल जाने से सहज पचता है व शरीर मे चर्बी मे रुपांतरीत नही होता।
३. दिन मे सोना और देर रात जगना छोडे-

दिन मे सोने की वजह से शरीर मे कफ दोष बढता है जो पचन क्रिया एवं मेटाबोलिजम को कम कर देता है, जो मेद के उत्पती के लिए मुख्य कारण है। रात मे देर से सोने की आदत जीन लोगो को होती है उन के शरीर मे पचन क्रिया कम होने के साथ कुछ ऎसे हार्मोन्स बढ जाते है जो चर्बी निर्माण मे मुख्य कारण होते है। इस कारण दिन मे सोना और देर रात जगना  ये दोनो आदते छोडनी चाहीये।


४.व्यायाम/ योगा/ एरोबिक व्यायाम-
शरीर के चर्बी को पीघलाने के लिए योग्य मात्रा मे व्यायाम की अत्यंत आवश्यकता है, बिना व्यायाम के शरीर की चर्बी कम होना लगभग असंभव है। इसके लिए रोज ४५ से ६० मिनट तक योग्य व्यायाम/ योगा या एरोबिक व्यायाम पद्धती का अवलंब करे। रनींग, जॉगिंग, सायकल, झुंबा डान्स, स्विमिंग ऎसी अन्य एरोबिक व्यायाम का भी कॅलरी व चर्बी जलाने मे फायदा होता है। योगा करते वक्त पेट की चर्बी कम होने के लिए स्पेसिफिक योगासन करना न भुलिए। रोजाना सूर्य नमस्कार की सभी क्रियाएं, सर्वागासन, भुजंगासन, वज्रासन, पदमासन, शलभासन करना लाभदायक हो सकता है।

५.योग्य समय पर खाने का किजीये सेवन-
असमय खाना खाने के वजह से उसका पचन योग्य नही होता और वो शरीर मे अर्ध पचीत आम को उत्पन्न करता है, जो पॆट की और अन्य बिमारीयो को पैदा तो करता ही है साथ मै चयापचय क्रिया मंद करके चर्बी का निर्मान बढाता है। इस वजह से खाना आयुर्वेदिक पित्त दोष के समय मे ही खाये, जो की सुबह १० से १ बजे तक और शाम को ७ बजे से पहले होता है। इस समय जाठराग्नी तीव्र रहती है, जो खाये हुए अन्न को अच्छे से पचाती है। सुबह जादा देर तक भुके न रहे, योग्य समय पर नाश्ता भी पाचन शक्ती को ठीक रखता है।

६. रात का खाना कम रखिये-
रात का खाना ७ बजे से पहले और कम मात्रा मे होना चाहिये जो आसानी से पाचन हो सके। खाना खाने के बाद तुरंत न सोये, ऎसा करने से अन्न का योग्य पचन नही होता। डिनर और सोने के वक्त मे कमसे कम ३ घंटो का अंतर होना जरुरी है।

७. चीनी और मीठी चीजे करे वर्जीत-
चीनी और मीठी चीजो मे सबसे जादा कॅलरी मौजुद होती है, इसके जादा मात्रा मे सेवन करणे से इसमे मौजुद कार्बोहायड्रेड्स का फॅट्स मे रुपांतर होता है और ऎसी बढी हुई फॅट्स पेट व नितंब प्रदेश मे जमा होने लगती है। इस कारण मीठाईया, केक, चॉकलेट, आइसक्रीम, कोल्ड्रींक्स, आलु इन सबका सेवन वर्ज करना चाहिये।

८.लहसुन का करे सेवन-
लहसुन उत्कृष्ट लेखन द्रव्य है जो अतिरीक्त चर्बी व बॅड कोलेस्टेरॉल को कम करता है। सुबह मे ४ से ५ लहसुन की कली खाने से फायदा दीखना शुरु होता है, शुरु मे इसकी तीव्र गंध के कारण इसके सेवन मे दिक्कत आ सकती है लेकीन कुछ दिनो के अभ्यास से ये एक आम बात हो जाती है।

९.फल और सब्जीयो का करे जादा इस्तेमाल-
फलो और सब्जीयो मे बॅड कॅलरी कम होती है इस वजह से इनका खाने मे जादा इस्तेमाल करे। इनमे मौजुद डायटरी फायबर्स शरीर मे मौजुद चर्बी कम करणे व पचन प्रक्रिया सुयोग्य रखने मे मदद करते है।

१०. अल्कोहोल की आदत छोडे-
 अगर आप रोज अल्कोहोल का सेवन कर रहे हो तो आप शरीर मे चर्बी एवं कोलेस्टेरॉल को बढने के लिए न्योता दे रहे हो। अल्कोहोल पिने की आदत लीवर एवं पचन संस्था के लिए सबसे जादा हानिकारक है।

११. तेल व वनस्पती घी का प्रयोग कम करे-
आहार मे वनस्पती घी बिलकुल भी न इस्तेमाल करे, इससे दुर रहना ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। शुद्ध देसी गाय के घी के अलावा दुसरा कोई भी घी न खाये, खाना बनाने मे सब तेल वर्जीत कर के सीर्फ सुर्यफुल तेल का इस्तेमाल करे।


Monday, 6 August 2018

How to get rid of Dark Circles & eye bags around eyes


Suffering from under eye dark circles & eye bags? 
Here are some ayurvedic tips..

Due to stress in daily life insomnia, anorexia, anxiety is common. Due to increased stress, under eye dark circle & under eye skin bags are common in women. Many solutions are given in magazines & internet but only few of them works well.
But ayurveda has better solution to these under eye dark circle & eye bags. According to ayurveda under eye dark circle is sign of Rasa dhatu Kshaya which is caused by stress, poor intake of water, unhealthy diet, sleeping late at night & habit of sleeping in a day.

Tips to Remove Dark circles & eye bags-
1. Avoid using computer or mobile for prolonged time especially during night. This causes stress on eyes & increases dark circles.



2. Drink water as per body’s requirement; don’t cut down water intake at workplace to avoid frequent urinal visits. Eat fresh fruits and vegetables, especially the ones rich in fiber. Avoiding excess of sweets and chocolates also helps.

3. Take a balanced & healthy diet at proper timings of pitta, lunch must be taken before 1pm & it is good to take dinner around 7pm. Food taken during pitta timings get digested & absorbed well in body, which provides nutrition which is essential for proper skin & eye’s health. Junk, preservative-heavy food and lack of fresh salads and adequate nourishing food in your diet will also cause the skin to look sallow and give you dark circles.


4. Avoid stress-
Most people who are very stressed out also have sleep problems. Either they suffer from disturbed sleep and toss and turn or due to incessantly thinking doesn’t get to sleep. They often wake up groggy in the morning.

5. Eye pack or Bidalak for dark circles-
Special mixture of ayurvedic herbs is applied on skin under the eyes is called as Bidalak which is very useful to remove dark circles& eye bags. This formulation must be used under the guidance of ayurveda doctor.

6. Aloe vera gel/ Raw Potato/ Rose water for dark circles-
Apply the gel under the eyes and massage for a few seconds. Leave it on for about 10-12 minutes. Clean with a moist cotton pad. Rose water Or Raw Potato can be used for the same.


7. Ayurvedic anti stress medicines such as brahmi, jatamansi etc. & abhyanga, shirodhara helps to get free from stress, which is one of the main reasons of dark circles.


8. Ayurvedic procedures such as Tarpana, putapaka, pindi, bidalaka helps to cure such condition.


9. Yogasana & pranayama-
Avoid stress, tension, anxiety by practicing Yogasanas & Pranayama. Daily 30 minutes of yoga practice will distress your body & rejuvenate skin & eyes. Anuloma-Viloma pranayama, Bhasrika, Tratak will be helpful for this condition.







Thursday, 2 August 2018

Proven Ayurveda Tips to manage your stress

Proven Ayurveda Tips to manage your stress

Stress is actually a normal part of life. At times, it serves a useful purpose. Stress can motivate you to get that promotion at work, or run the last mile of a marathon. But if you don't get a handle on your stress and it becomes long-term, it can seriously interfere with your job, family life, and health. 

The fact that stress plays an important role in the aetiology of several diseases is well recognized in Ayurveda, where, stress is known as sahasa. Caraka advises to avoid sahasa(stress) as it adversely affects the body. Different types of stressors physical, psychological and environmental as they vitiate dosas are implicated in the etiology of several diseases. Sahasa as it causes ojahksaya- (loss of immunity), increase the susceptibility of the body to various infectious diseases. Therefore, sahasa(stress) should be avoided as far as possible and body should be well protected by talking adequate care of the three sub pillars of life-diet, sleep and celibacy.

Causes of Stress-
We all react differently to stressful situations. What is stressful to one person may not be stressful to another. Almost anything can cause stress. For some people, just thinking about something or several small things can cause stress.
  • Issues about Job and The Workplace
  • Financial Problems
  • lack of time or money
  • Personal Relationships, marriage , Divorce
  • Illness, family problems
  • Children
  • Daily Hassles / Being Too Busy

Changes to the body
Stress slows normal bodily functions, such as the digestive and immune systems. All resources can then be concentrated on rapid breathing, blood flow, alertness, and muscle use.
The body changes in the following ways during stress:
  • blood pressure and pulse rate rise
  • breathing is faster
  • the digestive system slows down
  • immune activity decreases
  • the muscles become tense
  • a heightened state of alertness prevents sleep
Types of Stress-
Acute stress

This type of stress is short-term and is the most common way that stress occurs. Acute stress is often caused by thinking about the pressures of events that have recently occurred, or upcoming demands in the near future. It does not cause the same amount of damage as long-term, chronic stress. Short-term effects include tension headaches and an upset stomach, as well as a moderate amount of distress. However, repeated instances of acute stress over a long period can become chronic and harmful.
Episodic acute stress
People who frequently experience acute stress, or whose lives present frequent triggers of stress, have episodic acute stress.
A person with too many commitments and poor organization can find themselves displaying episodic stress symptoms. These include a tendency to be irritable and tense, and this irritability can affect relationships. Individuals that worry too much on a constant basis can also find themselves facing this type of stress. This type of stress can also lead to high blood pressure and heart disease.
Chronic stress

This is the most harmful type of stress and grinds away over a long period. Ongoing poverty, a dysfunctional family, or an unhappy marriage can cause chronic stress. It occurs when a person never sees an escape from the cause of stress and stops seeking solutions. Sometimes, it can be caused by a traumatic experience early in life. Chronic stress can continue unnoticed, as people can become used to it, unlike acute stress that is new and often has an immediate solution. It can become part of an individual's personality, making them constantly prone to the effects of stress regardless of the scenarios they come up against. People with chronic stress are likely to have a final breakdown that can lead to suicide, violent actions, heart attacks, and strokes.

Stress-Management by Ayurveda

 The fact that ‘prevention is better than cure’ is well recognized in Ayurveda, as its foremost objective is maintenance and promotion of the health of the healthy.

       
1.Avoiding Stress :
Sahasam sada varjayate. Rationally the best approach is to hit at the root cause, and this is particularly ideal strategy in the stress management. However, in today’s world of bottle neck competition, stress is an inevitable companion of success. This stress is justified also because of the results it brings along; however, the stress induced diseases cannot be acceptable.

      
2.    Ahara:
The coping capacity of the body can be increased by life style modifications, dietary interventions and / or drug treatment. Take nutritious & digestible diet at regular timings. Avoid Apathyakar diet.
      
      


       3.    Take a Bath:

For temporary stress taking a bath with hot water is helpful to relieve stress. Bath relaxes the nervous system, releases tension, and helps to quiet the mind. Use hot water for kapha and vata, warm water for pitta.

4.    Do Abhyanga (Ayurvedic Oil Massage):
This ancient practice of self-massage with oil calms the nervous system, lubricates and rejuvenates the tissues, and promotes healthy circulation throughout the body. It is no coincidence that the Sanskrit word for oil, sneha, also means love. 
 Each morning, before a shower or bath, massage about ¼–½ cup warm organic oil into the skin.


5.    Massage Your Feet Before Bed:
Before bed, apply some warm seasome Oil to your feet. Or if you prefer, use plain  Brahmi Oil, or Bhringaraj Oil. This practice grounds the energy, soothes the nervous system, reduces stress, quiets the mind, and promotes sound sleep. Remember that sleep is one of the body’s most essential avenues of rejuvenation. Be sure to wear some old socks to bed to protect your sheets.
6.    Rasayana Therapy:

Dietary interventions and drug treatment all these being well organized under the umbrella of rasayana therapy, rasayana tantra as the branch that improves longevity along with physical and mental strength and immunity.
Acara rasayana, constitutes the balanced use of sense organs, non-violence and self control is advised. This also suggests a regular routine free from stress.
Ajasrika rasayana is about observing a nutritious and balanced dietary routine. A balanced diet consisting of all the six rasas and modified as per desa, kala (climate, environment and season), age and prakrti (dosic constitution) of the individual. In disease states, the dietary substances opposite to vitiated dosas are advised.
Chyavanprash, BrahmaRasayana, Amalaki Rasayana theses are some of popular rasayana medicines.

        7.    Pranayama:
Prana, the vital breath, is the subtle essence of the life force that animates each of us. It infuses every cell and tissue throughout our bodies and is carried on and stimulated by the breath. Imbibing prana helps to restore fluidity and vitality to the subtle energy channels of the body while digesting and eliminating stagnation and ama (toxins). One of the best ways to bathe our tissues in fresh prana is to practice pranayama (yogic breathing exercises). The practice of Nadi Shodhana is especially effective at clearing accumulated tension, relieving stress, and supporting an improved mental disposition in the face of everyday stressors.

      
8.Yoga:
Yoga moves prana in the body, helps to dissipate tension, clears stagnation, and encourages fluidity, both in the tissues as well as in the mental and emotional spheres.

      9.Supportive Herbs and Formulas:

Ayurveda also reveres a number of herbs for their ability to foster clarity and health in the mind-body organism. Ayurveda has plenty of anti stress medicines but these should be always used with proper guidance of ayurveda expert. These herbs specifically bolster the mind and the nervous system, and can help to encourage a sense of ease in the face of our daily challenges.